बीज उपचार (seed treatment) जैविक कृषि कर रहे किसानों के लिए महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। खेतों में कई बीज अंकुरित होने से और अनाज उत्पन्न करने से पहले ही कीड़ों या बिमारियों का शिकार हो जाते हैं। किसान बीजों को रोगों से बचाने और स्वस्थ फसल के बेहतर उत्पादन के लिए बीज उपचार का उपयोग करते हैं। बीज उपचार ऐसी तकनीकें हैं जिन्हें बुवाई से पहले बीजों या पौधों पर लगाया जाता है। उदाहरण के लिए कैनोला, गेहूं, सरसों जैसी फसलों और गाजर, पत्तागोभी, ब्रोकली जैसी सब्जियों पर बीज उपचार का प्रयोग किया जाता है। 
बीज उपचार (seed treatment)की प्रक्रिया
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बीज उपचार के लिए लगने वाले सामान क्या-क्या होने चाहिए
बीज उपचार (seed treatment) कई विधियों से किया जा सकता है।
नमक घोल विधि – बीज को 20 प्रतिशत नमक के घोल (20 ग्राम नमक प्रति 100 मिली पानी) में डालकर हल्के बीजों को छांट लिया जाता है।
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सूखी विधि – इसमें सूखे बीजों को फफूंदनाशी या कीटनाशी पाउडर के साथ एक बंद डिब्बे में अच्छी तरह मिलाया जाता है, जिससे दवा की परत उन पर चढ़ जाए।
गीली विधि – रसायनों को पानी में घोलकर बीजों को 15-20 मिनट के लिए भिगोया जाता है, फिर छाया में सुखाकर बुवाई की जाती है।
जैविक बीज उपचार – टाइकोडर्मा (10 ग्राम या किग्रा बीज) या स्यूडोमोनस फ्लोरेसेंस का उपयोग किया जाता है। बीजों को गुड़ के पानी से गीला करके इन जैव नाशी से उपचारित किया जाता है।
गर्म पानी विधि – बीजों को 50 डिग्री सेलसियस गर्म पानी में 15-20 मिनट तक डुबोकर रखा जाता है, जिससे बीज जनित रोग नष्ट हो जाते हैं।
